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Mushfiqur Rahim Retirement:ODI से संन्यास का ऐलान

On: November 21, 2025 10:28 PM
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नमस्ते दोस्तों!
आज की इस ख़ास पोस्ट में मैं आपको एक ऐसी दास्ताँ सुनाने जा रहा हूँ जिसने क्रिकेटप्रेमियों की धड़कनें एक पल के लिए रोक देगी। बात हो रही है बांग्लादेश के “मि. डिपेंडेबल” मुशफ़िक़ुर रहीम की—वही खिलाड़ी जिसने 19 साल तक टीम को अपनी मुट्ठी में जकड़े रखा, अचानक मार्च 2025 में ODI क्रिकेट को “अलविदा” कह गया।

लेकिन क्या ये संन्यास सचमुच “अचानक” था? चलिए, कहानी को पलट-पलट कर देखते हैं।

19 साल का सफ़र: आख़िरी पड़ाव पर कौन-सा घाव हरा था?

  • चैंपियंस ट्रॉफी 2025: मुशफ़िक़ के बल्ले से निकले कुल 17 रन, दो बड़े मैचों में 0 व 2।
  • ड्रेसिंग रूम की ख़ामोशी: कोच ने नेट्स में एक घंटा अतिरिक्त बैटिंग कराई, पर रिज़ल्ट शून्य।
  • सोशल मीडिया पर “Mushfiqur 0” टॉप ट्रेंड—भारतीय फैन्स ने 2016 वाला ट्वीट फिर उठा दिया।
  • 3 बजे रात का व्हाट्सऐप मैसेज: “Bro, I’m done. 19 years is enough.”—ये था उनका अपना टेक्स्ट, किसी बोर्ड अफ़सर को नहीं, बल्कि childhood friend को।

वो पुराना ट्वीट जो आग में घी बन गया

2016 T20 वर्ल्ड कप के बाद रोहित शर्मा ने लिखा था—“Never give up.” जब भारत वेस्टइंडीज़ से हारा, मुशफ़िक़ ने इमोजी वाली ख़ुशी ट्वीट कर दी। उस वक़्त 2-sec की भावनात्मक reaction, 9 साल बाद उनके खिलाफ हथियार बन गई। 2025 के ग्रुप-स्टेज exit के बाद #MushfiqurZero ट्रेंड ने 48 घंटे तक ब्रेक नहीं लिया। मानसिक थकान का पारा चढ़ा और उन्होंने खुद ही प्लग खींच लिया।

ड्रेसिंग-रूम का अनकहा दृश्य

Sources बताते हैं, आख़िरी मैच के बाद कप्तान शाकिब ने उन्हें कोने में ले जाकर कहा, “Mushi, we need you for 2027 WC.” जवाब में मुशफ़िक़ ने सिर्फ़ स्माइल दी और बैग उठा लिया। कोई स्पीच, कोई प्रेस-नोट नहीं—बस एक छोटी-सी नोटबुक पर लिखा, “Thanks, Tigers. Over and out.”

बांग्लादेश की मिडिल-ऑर्डर पहेली

2007 से 2025—मुशफ़िक़ ने No. 4/5 पर 49 फिफ़्टीज़ ठोकीं; अगले बेस्ट महमुदुल्लाह की 24।

विकेटकीपिंग + बैटिंग combo: उनके बिना बैक-अप विकेटकीपर Liton Das का ODI औसत 27.80, स्ट्राइक रेट 73।

युवा ऑप्शन—Jaker Ali, Aich Mollah—अभी प्रेशर cooker को हैंडल करने से कोसों दूर।

2027 वर्ल्ड-कप क्वालिफ़ायर राउंड की तैयारी शुरू; selectors के पास सिर्फ़ 18 महीने।

विरासत: नंबरों से परे

mushfiqur rahimc


7800+ रन, 6 शतक, 44 अर्धशतक—ये सिर्फ़ कॉलम हैं। असली कहानी है 2014 ऑकलैंड की that 107* जिसने बांग्लादेश को न्यूज़ीलैंड में पहली बार वन-डे सीरीज़ जिताई। ये है 2018 वेस्टइंडीज़ में that 219*, जो अभी भी बांग्ला बल्लेबाज़ों का सबसे बड़ा टेस्ट स्कोर है। और ये भी है वो glove-work जिसने शाकिब-मुस्तफ़िज़र को एक्स्ट्रा कॉन्फिडेंस दिया।

एक “पर्फेक्ट” गुडबाय नहीं, पर एक “ह्यूमन” गुडबाय


मुशफ़िक़ ने कोई “फेयरवेल सीरीज़” नहीं माँगी, ना ही ड्रामा किया। उन्होंने बस इतना कहा, “I want fans to remember the 19-year-old boy who danced after beating India, not the 36-year-old who got out on zero.” ये इंसानी फ़ैसला था—नाकामी, ट्रोल, और खुद की उम्मीदों का निचोड़।

Takeaway
क्रिकेट एक ऐसा खेल है जो आपको हीरो बना देता है और अगले ही सप्ताह मेम बना देता है। मुशफ़िक़ुर रहीम ने अपने दम पर एक पूरी जनरेशन को विश्वास दिलाया कि बांग्लादेश भी giants को हरा सकता है। अगर उनका आख़िरी चैप्टर “perfect” नहीं है, तो कोई बात नहीं—क्योंकि real legends stories perfect नहीं, real होती हैं।

तो दोस्तों, जब भी कोई नया विकेटकीपर-बल्लेबाज़ बांग्ला टीम में आएगा, वो shadow मुशफ़िक़ की होगी—19 साल की लगन, 7800 रनों की भरोसेमंद मिसाल, और एक “नॉट-सो-फेयरवेल” जो हमें याद दिलाता है: even superheroes need a quiet exit.

दोस्तों, ये बात तो माननी पड़ेगी कि मुशफिकुर रहीम बांग्लादेश क्रिकेट के लिए पिलर थे. उनके जाने के बाद टीम में एक बड़ा शून्य आ गया है.

अनुभव का अंत: मुशफिकुर अपनी पीढ़ी के सबसे अनुभवी और दिमागी (Calm) खिलाड़ी थे. कठिन परिस्थितियों में पारी को संभालने की कला उन्हें बखूबी आती थी.

विकेटकीपिंग संकट: बल्लेबाज़ी के साथ-साथ, विकेटकीपिंग में भी उनका अनुभव टीम के लिए अमूल्य था. अब बांग्लादेश को एक भरोसेमंद विकेटकीपर-बल्लेबाज़ ढूंढना पड़ेगा, जो दोनों रोल में फ़िट हो जाए. युवा खिलाड़ियों पर दबाव: उनके जाने से अब सारा दबाव शाकिब अल हसन और युवा खिलाड़ियों पर आ जाएगा. टीम के कप्तान को भी अपनी रणनीति पूरी तरह से बदलनी पड़ेगी. उनका संन्यास, टीम को 2027 वर्ल्ड कप से पहले पुनर्गठन (Restructuring) के एक कठिन दौर में धकेल देगा.

दोस्तों, ये साफ़ है कि मुशफिकुर रहीम का जाना सिर्फ़ एक खिलाड़ी का जाना नहीं है, बल्कि बांग्लादेश क्रिकेट में एक युग का अंत है.

अगर ये पोस्ट आपको अंदर तक छू गई, तो कमेंट में लिखिए—आपकी नज़र में मुशफ़िक़ का सबसे यादगार पल कौन-सा है? और हाँ, शेयर करना न भूलिए—क्योंकि असली क्रिकेट-प्रेमी ही इस दर्द की कद्र कर सकते हैं।

D.K DAS

Senior Analysis Editor
D.K. Das स्पोर्ट्स, टेक्नोलॉजी और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के गहन विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं. उनका लेखन हमेशा तथ्यात्मक (factual) होता है, जिसमें वह सामान्य ख़बरों के पीछे की रणनीति और 'Inside Story' को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाते हैं. 5 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दास, जटिल राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं।

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