इंटरनेट पर आकांक्षा की उम्र को लेकर एक ऐसी बहस छिड़ी है जिसका जवाब न तो विकिपीडिया के पास है और न ही किसी न्यूज़ पोर्टल के पास। लोग अक्सर पूछते हैं कि 30 के पार होकर भी कोई 20 साल की लड़की जैसा कैसे दिख सकता है? क्या यह सिर्फ योग का जादू है या इसके पीछे कोई ऐसी कहानी है जिसे सुनकर आपकी आँखों में आँसू आ जाएंगे? सच्चाई वह नहीं है जो दिखती है, बल्कि वह है जो आकांक्षा ने अपने दिल के किसी कोने में दबा रखी है…
नमस्कार दोस्तों आज आकांक्षा चमोला की कुछ अनसुनी बातें लेकर इस ब्लॉग में आए है मैं आशा करता हु कि आपको ये ब्लॉग पढ़ने में अच्छा लगे ।
1. जन्म, जड़ें और बचपन का संघर्ष
आकांक्षा चमोला का जन्म मुंबई की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी के बीच हुआ। हालाँकि, उनका परिवार मूल रूप से उत्तराखंड के पहाड़ों से ताल्लुक रखता है। शायद यही कारण है कि उनकी शख्सियत में मुंबई का आत्मविश्वास भी है और पहाड़ों वाली सौम्यता और ईमानदारी भी।
उम्र का सच: सिर्फ एक संख्या
इंटरनेट पर आकांक्षा की उम्र को लेकर अक्सर चर्चा होती है। उनका जन्म 1991 (कुछ स्रोतों के अनुसार 1990) में हुआ था। आज 2024-25 के पड़ाव पर वह अपनी उम्र के तीसवें (30s) दशक के मध्य में हैं। लेकिन जब आप उन्हें देखते हैं, तो उम्र का यह आंकड़ा बेमानी लगने लगता है। उनकी फिटनेस और उनके चेहरे की मासूमियत आज भी वैसी ही है जैसी उनके शुरुआती दिनों में थी। उन्होंने यह साबित किया है कि अगर आप मन से जवान हैं और अपनी सेहत का ख्याल रखते हैं, तो उम्र की लकीरें आपकी खूबसूरती को कम नहीं, बल्कि और निखार देती हैं।
2. अभिनय की दुनिया में कदम: ‘स्वरागिनी’ और वह पहचान

आकांक्षा ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी, लेकिन उनका असली सपना हमेशा से अभिनय की दुनिया में कुछ बड़ा करने का था।
- चुनौतियां और रिजेक्शन: बिना किसी गॉडफादर के मुंबई जैसे शहर में पहचान बनाना आसान नहीं था। आकांक्षा ने भी अनगिनत ऑडिशन दिए और कई बार रिजेक्शन का सामना किया। लेकिन उनकी ‘ह्यूमैनिटी’ और ‘पॉजिटिविटी’ की मिसाल यह है कि उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
- स्वरागिनी का जादू: टीवी सीरियल ‘स्वरागिनी’ में परिणीति के किरदार ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया। उनके अभिनय में एक ठहराव था, जो दर्शकों को अपनी ओर खींचता था। इसके बाद उन्होंने ‘भाग्यलक्ष्मी’ और ‘गंगा’ जैसे शोज में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
3. गौरव खन्ना और आकांक्षा: एक रूहानी जुड़ाव
जब हम आकांक्षा की बात करते हैं, तो उनके पति और मशहूर अभिनेता गौरव खन्ना (अनुज कपाड़िया) का ज़िक्र आना लाज़मी है। इन दोनों की जोड़ी को टीवी इंडस्ट्री की सबसे प्यारी और ‘रियल’ जोड़ियों में गिना जाता है।
कैसे शुरू हुई यह दास्तां?
इनकी मुलाकात एक ऑडिशन के दौरान हुई थी। मज़ेदार बात यह है कि शुरुआत में आकांक्षा को यह नहीं पता था कि गौरव पहले से ही एक स्थापित अभिनेता हैं। उन्होंने गौरव को एक्टिंग के कुछ टिप्स भी दे दिए थे! गौरव को आकांक्षा की यही बेबाकी और मासूमियत भा गई।
शादी और साथ (24 नवंबर 2016)
साल 2016 में दोनों ने शादी की। आज भी जब हम उनकी तस्वीरें देखते हैं, तो उनमें पति-पत्नी से ज्यादा दो ‘बेस्ट फ्रेंड्स’ नज़र आते हैं। आकांक्षा ने हमेशा गौरव के करियर में उनका साथ दिया और गौरव ने हमेशा आकांक्षा की आज़ादी और उनके सपनों का सम्मान किया। यह रिश्ता आज के युवाओं के लिए एक मिसाल है कि कैसे सफलता के बीच भी ज़मीन से जुड़ा रहा जा सकता है।
4. फिटनेस, लाइफस्टाइल और सादगी का संगम

आकांक्षा चमोला अपनी खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका राज कोई महंगा कॉस्मेटिक नहीं, बल्कि उनकी जीवनशैली है?
- योग और मानसिक स्वास्थ्य: आकांक्षा रोज़ाना योग और ध्यान (Meditation) करती हैं। उनका मानना है कि असली खूबसूरती अंदरूनी शांति से आती है।
- शुद्ध आहार: वह बाहर के जंक फूड के बजाय घर का बना दाल-चावल और सादा भोजन पसंद करती हैं।
- नेचर लव: उन्हें पहाड़ों पर घूमना और प्रकृति के करीब रहना पसंद है। वह अक्सर कहती हैं कि प्रकृति हमें विनम्र होना सिखाती है।
5. मानवीय पहलू: एक दयालु हृदय (Humanity Style)
आकांक्षा सिर्फ परदे पर ही नहीं, असल ज़िंदगी में भी एक नायक की तरह सोचती हैं।
- बेज़ुबानों के प्रति प्रेम: उन्हें जानवरों से बहुत लगाव है। वह अक्सर सड़कों पर रहने वाले कुत्तों और बिल्लियों की मदद करती देखी जाती हैं।
- फैंस के साथ रिश्ता: वह अपने फैंस को कभी ‘फॉलोअर्स’ नहीं मानतीं, बल्कि उन्हें अपना एक बड़ा परिवार समझती हैं। उनके सोशल मीडिया पर आपको कभी घमंड नहीं, बल्कि सिर्फ प्यार और प्रेरणा मिलेगी।
- सादगी: सेलिब्रिटी होने के बावजूद वह आज भी अपने जड़ों से जुड़ी हुई हैं। वह त्योहारों को पूरी परंपरा के साथ मनाती हैं और परिवार के मूल्यों को सबसे ऊपर रखती हैं।
6. उम्र और परिपक्वता (Maturity) का नया दौर
आज जब आकांक्षा अपने जीवन के एक मैच्योर फेज में हैं, तो उनकी सोच में भी गहराई आई है। वह मानती हैं कि 30 की उम्र के बाद एक महिला को समाज की तय की गई सीमाओं में नहीं बंधना चाहिए। वह आज भी उतनी ही सक्रिय हैं, उतनी ही स्टाइलिश हैं और उतनी ही उत्साही हैं। उनकी उम्र उनके लिए अनुभवों की एक पोटली की तरह है, जिसने उन्हें और अधिक समझदार बनाया है।
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